रायबरेली संवाददाता सन्दीप मिश्रा की रिपोर्ट








रायबरेली। जिले के डीह कस्बा समेत कई अन्य जगहों पर प्रशासन ने आरा मशीनों का औचक निरीक्षण किया और प्रतिबंधित लकड़ी का कटान करने वाले लोगों पर शिकंजा कसा। इस कार्रवाई से आरा मशीन संचालकों में हड़कंप मच गया।
बृहस्पतिवार को वन अधिकारी और तहसीलदार ने कस्बे में चल रही आरा मशीनों के औचक निरीक्षण को निकल पड़े। सबसे पहले प्रशासनिक टीम डीह कस्बा में नसीर की आरामशीन पर पहुंची और प्रतिबंधित लकड़ियों की जांच की। इसके बाद टीम फरियाद अली अंसारी के आरा मशीन पर जांच करने के बाद अन्य स्थानों पर संचालित आरा मशीनों में जांच करने पहुंची।
प्रशासनिक टीम को देख काम कर रहे मजदूर भाग खड़े हुए। आरा मशीनों पर अधिकारियों की छापेमारी की सूचना कस्बे में जंगल में आग की तरह फैल गई, जिससे सभी आरा मशीन संचालकों में हड़कंप मच गया। एसडीएम ने पूरे मामले की जांच वन विभाग को सौंपते हुए गंभीरता से जांच करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जांच के बाद रिपोर्ट मांगी है। वन विभाग की टीम पूरे मामले की जांच पड़ताल कर रही है।
हालांकि लकड़ी का कटान कर रहे ठेकेदारों का कहना है कि उनके पास परमिशन मौजूद है। लेकिन सवाल यह बनता है कि प्रतिबंधित लकड़ी को काटने की परमिशन इन लोगों को किसने और क्यों दी। जांच इस बात की भी होनी जरूरी है कि प्रतिबंधित पेड़ों के कटान का गोरखधंधा आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है।
प्रतिबंधित लकड़ी का कटान एक गंभीर मुद्दा है, जो पर्यावरण और वन्य जीवन के लिए खतरनाक है। इस मामले में प्रशासन की जांच और कार्रवाई जरूरी है। प्रशासन की जांच के बाद, यदि प्रतिबंधित लकड़ी के कटान के दोषी पाए जाते हैं, तो उन पर कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, प्रशासन यह भी देखेगा कि प्रतिबंधित पेड़ों के कटान का गोरखधंधा किसके संरक्षण में चल रहा है।