अकीदत के साथ मना पैगंबर इब्राहिम के बलिदान का पर्व बकरीद

  बकरीद की नमाज अता करते इस्लामिक धर्मावलम्बी  पैगंबर हजरत इब्राहिम के अल्लाह के प्रति समर्पण को सम्मान देने एवं उनके अपने बेटे हजरत इस्माइल की खुद की इच्छा से कुर्बानी देने की याद में मनाया जाने वाला इस्लामिक चंद्र कैलेंडर के बारहवें महीने यानि धू- अल-हिज्जाह के दसवें दिन पवित्र पर्व बकरीद शिकारपुर परिक्षेत्र के सेमरा राजा,अगया,कोदईला ,भिसवा, दरौली,इमिलिया, कृतपिपरा, गिदहा,पकड़ी खुर्द, सिसवा बाबू,पिपरा बाबू,रामपुर सतभरिया ,करमहा,गौनरियां बाबू,बरवा विद्यापति, शिकारपुर, बल्लोखास, परसा गिदही, हड़तो ड़हिया, विशुनपुरभड़ेहर,लक्ष्मीपुर एकडंगा, गोपाला, विशुनपुर गबडुवा, बेलवा टीकर,पुरैना खंडी चौरा, पिपराइच उर्फ पचरुखिया, करमही,हरपुर महंत,पिपरा मुंडेरी आदि गांवों में स्थित ईदगाहों व मस्जिदों में नमाज अता कर ,एक दूसरे से गले मिल एवं बकरे की कुर्बानी देकर मनाया गया। मान्यता है कि अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर पैगंबर हजरत इब्राहिम ने अल्लाह के प्रति समर्पण भाव से अपने बेटे इस्माइल की कुर्बानी दे दी लेकिन जब आंखों से पट्टी हटाई तो बेटा बिल्कुल सलामत था और कुर्बानी के स्थान पर बकरा था। तभी से ही इस्लाम धर्म के अनुयायियों द्वारा बकरीद के दिन बकरे की कुर्बानी दी जाती है।

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