लखनऊ के मेयर पद के लिए पर्दे के पीछे से पैरवी, टिकट के लिए हर पार्टी में दिख रही दावेदारों की सक्रियता


लखनऊ मेयर प्रत्याशी की खातिर दावेदारों की दौड़ शुरू हो गई है। कोई जातीय समीकरण साधते हुए टिकट मांग रहा है तो कोई बड़े नेताओं की चौखट से अपने पक्ष में फैसला करवाने में जुटा है। फिलहाल आरक्षण तय न होने के कारण ज्यादातर दावेदार खुलकर सामने नहीं आ रहे, लेकिन पर्दे के पीछे से पैरवी और दावेदारी शुरू हो गई है।

लखनऊ: लखनऊ नगर निकाय चुनाव की दुंदुभी बजने से पहले हर दल में मेयर प्रत्याशी की खातिर दावेदारों की दौड़ शुरू हो गई है। कोई जातीय समीकरण साधते हुए टिकट मांग रहा है तो कोई बड़े नेताओं की चौखट से अपने पक्ष में फैसला करवाने में जुटा है। फिलहाल आरक्षण तय न होने के कारण ज्यादातर दावेदार खुलकर सामने नहीं आ रहे, लेकिन पर्दे के पीछे से पैरवी और दावेदारी शुरू हो गई है। भाजपा में मेयर के टिकट के दावेदारों के लिए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का तीन दिन का लखनऊ दौरा काफी अहम माना जा रहा है। वहीं, कांग्रेस और सपा में भी प्रत्याशी का नाम फाइनल करने के लिए बैठकें शुरू हो चुकीं है।
मेयर के टिकट के लिए सबसे ज्यादा घमासान बीजेपी में होने की अटकलें हैं। मौजूदा मेयर संयुक्ता भाटिया 75 साल की हो चुकी हैं। पार्टी ने इससे ज्यादा उम्र के दावेदारों को टिकट न देने के संकेत दिए हैं। ऐसे में एक धड़ा मान रहा है कि संयुक्ता भाटिया की बहू रेशू भाटिया को टिकट मिल सकता है, लेकिन इससे पार्टी पर परिवारवाद का आरोप लग सकता है।
वहीं, लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह क्षत्रिय जाति से आते हैं। ऐसे में किसी ब्राह्मण या कायस्थ को मेयर का टिकट मिलने के भी कयास हैं। बीते दिनों राजनाथ सिंह से शहर के दो बड़े कारोबारियों की मुलाकात को इस लिहाज से अहम माना जा रहा है। सूत्रों की मानें तो शहर के नामी उद्योगपति विराज सागर दास और सुधीर हलवासिया की बीजेपी के बड़े नेताओं के बीच सक्रियता अचानक बढ़ गई है।

जानकारी के मुताबिक, बीजेपी नगर उपाध्यक्ष रह चुके सुनील मिश्रा भी मेयर की टिकट के लिए दावेदारी कर रहे हैं। वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के चुनाव संयोजक रहे पूर्व एमएलसी राघवराम मिश्रा के बेटे हैं। बीजेपी की पिछली सरकार में सुनील मिश्रा ने लखनऊ के 110 वॉर्डों में 330 सफाई चैंपियनों की टीम खड़ी कर दी थी। वहीं, वरिष्ठ नेता ओपी श्रीवास्तव भी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके बेटे नीरज सिंह से मुलाकात कर दावेदारी कर रहे हैं।
रिमोट सेंसिंग के दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री सुधाकर त्रिपाठी को भी बीजेपी से मेयर टिकट के दावेदार के तौर पर देखा जा रहा है। उन्हें शहर के पूर्व मेयर और पूर्व डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा का काफी करीबी माना जाता है। इस लिहाज से उनकी दावेदारी को कमतर नहीं देखा जा सकता है।
वहीं, नगर निगम कार्यकारिणी के उपाध्यक्ष कौशलेंद्र द्विवेदी, बीजेपी पार्षद दल के नेता रहे रामकृष्ण यादव के अलावा किसी सर्जन को टिकट भी टिकट मिलने के कयास लगाए जा रहे हैं। इसमें पूर्व सीएम राम प्रकाश गुप्ता के बेटे और बलरामपुर अस्पताल के पूर्व डायरेक्टर डॉ. राजीव लोचन और केजीएमयू में डीन पद से रिटायर्ड डॉ. विनोद जैन का नाम भी चर्चा में है।

कांग्रेस में भी कई दावेदार
कांग्रेस में भी मेयर के लिए दावेदारी का दौर शुरू हो गया है। पार्टी सूत्रों की मानें तो इस दौड़ में बसपा छोड़कर कांग्रेस का हाथ थामने वाले पूर्व मंत्री नकुल दुबे को सबसे आगे माना जा रहा है। वहीं, पूर्व मंत्री श्याम किशोर शुक्ल, प्रदेश कांग्रेस के कोषाध्यक्ष शिव पांडेय और शहर कांग्रेस अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव अज्जू को भी मजबूत दावेदार के तौर पर देखा जा रहा है।

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