ठंड में भगवान को भी पहनाए जा रहे गर्म कपड़े, लगाया जा रहा विशेष प्रकार का भोग


रिपोर्टर रतन गुप्ता

अपने आराध्य को कड़ाके की ठंड से बचाने के लिए भक्त गर्म कपड़े पहना रहे हैं। शहर के नामी मंदिरों से लेकर लोगों के घर के मंदिर में भी देवी देवताओं का वस्त्र मौसम के अनुकूल हो गया है। कोई ऊनी कपड़े पहना रहा है, तो कोई वेलवेट से सिले गर्म कपड़े पहना रहा है। कोई भगवान को रजाई ओढ़ा रहा है, तो कोई कंबल। किसी-किसी मंदिर के गर्भगृह में हीटर और ब्लोअर की व्यवस्था की गई है।

श्री श्री गोपाल मंदिर में भगवान ने पहने ऊनी कपडे

इसी तरह, देवी देवताओं के दैनिक भोग को भी मौसम के अनुकूल कर दिया गया है। गर्म खाद्य सामग्री के अलावा बादाम, पिस्ता, काजू, गुड़ आदि का भोग लगाया जा रहा है। साबूदाना की खिचड़ी और कुट्टू के आटे की पूड़ी का भोग लगाया जा रहा है।

गोलघर स्थित काली मंदिर में माता को ठंड से बचाने के लिए ऊनी शॉल ओढ़ाई जा रही है। मोहद्दीपुर स्थित श्री श्री गोपाल मंदिर में राधा कृष्ण, श्री लक्ष्मी-नारायण, भगवान शिव-पार्वती और लड्डू गोपाल को ऊन की पोशाकें पहनाई जा रही है ।
दरअसल, भगवान के भक्तों को लगता है कि जिस तरह मौसम का असर उन पर पड़ता है उसी तरह उनके आराध्य भी प्रभावित होते हैं। यही वजह है कि मंदिरों में मौसम के अनुकूल देवी देवताओं को वस्त्र पहनाया जाता है। भोग की व्यवस्था भी मौसम के अनुसार कर दी जाती है।

भगवान को लगता है विशेष प्रकार का भोग
श्री श्री गोपाल मंदिर के पुजारी कमला कांत ओझा ने बताया कि भगवान को सुबह बादाम, काजू और पिस्ता डालकर गर्म दूध का भोग लगाया जाता है। दोपहर में मेवे और गोंद से बने व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। गोलघर स्थित काली मंदिर के पुजारी कृष्ण गोपाल सैनी ने बताया कि मां को सर्दी के वक्त ऊनी शाल ओढ़ाई जाती है।

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