मुख्तार अंसारी को मिली जमानत, गैंगस्टर मामले में 10 साल की मिली थी सजा, अब कोर्ट ने लगाया स्टे —

क्राइम मुखबिर से उप संपादक रतन गुप्ता की रिपोर्ट –


गैंगस्टर मामले में 10 साल की सजा काट रहे मुख्तार अंसारी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। इस मामले में कोर्ट ने मुख्तार अंसारी पर लगाए गए फाइन पर स्टे लगा दी है। हालांकि कोर्ट ने सजा पर रोक नहीं लगाई है।


गैंगस्टर मुख्तार अंसारी मामले की सजा को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई की गई। इस दौरान कोर्ट ने मुख्तार अंसारी की जमानत याचिका को मंजूर कर लिया। साथ ही सजा के साथ लगाए गए 5 लाख रुपये के फाइन पर भी कोर्ट ने स्टे लगा दिया है। हालांकि कोर्ट ने सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। बता दें कि मुख्तार अंसारी की तरफ से जमानत देने और सजा पर रोक लगाने को लेकर याचिका दायर की गई थी, जिसपर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। मुख्तार को मिली सजा के खिलाफ कोर्ट में सुनवाई जारी रहेगी। हाईकोर्ट ने बहस पूरी होने के बाद 20 सितंबर को इस बाबत फैसले को सुरक्षित कर लिया था। बता दें कि इस मामले पर फैसला जस्टिस राजवीर सिंह की सिंगल बेंच ने सुनाया है।

मुख्तार अंसारी को मिली जमानत-

कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्तार अंसारी के वकील ने कोर्ट को बताया कि पिछले 12 साल और चार महीने से मुख्तार अंसारी जेल में बंद है। मुख्तार को जितनी सजा सुनाई गई है वह उससे ज्यादा ट्रायल के दौरान भुगत चुके हैं। बता दें कि इसी गैंगस्टर मामले में ही मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी को चार साल की सजा सुनाई गई है। हालांकि अफजाल पहले ही जमानत पर जेल से बाहर आ चुके हैं। इस सजा के बाद अफजाल अंसारी की संसद सदस्यता को खत्म कर दिया गया था।

मुख्तार और अफजाल अंसारी की सुनवाई-

गाजीपुर जिले के पूर्व सांसद अफजाल अंसारी के खिलाफ गैंगस्टर मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने वाली है। 4 साल की सजा दिए जाने के बाद अफजाल अंसारी की संसद सदस्या को निरस्त कर दिया गया था। इसी कड़ी में अफजाल अंसारी ने सुप्रीम कोर्ट में दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग की थी। इसपर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने वाली है। इस मामे में आज यूपी सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब देने वाली है। बता दें कि अफजाल अंसारी को 29 अप्रैल को एमपी-एमएलए कोर्ट ने गैंगस्टर मामले में दोषी ठहराते हुए 4 साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद अफजाल अंसारी की संसद सदस्यता को निरस्त कर दिया गया था।

क्राइम मुखबिर
अपराध की तह तक !

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *