OPINION: गांधी जी के सपनों को पीएम मोदी ने जमीन पर साकार किया है

क्राइम मुखबिर से उप संपादक रतन गुप्ता की रिपोर्ट –


क्रामुस- पीएम मोदी के भाषणों में अक्सर गांधीजी के कथनों और विचारों का समावेश दिखता है.पीएम मोदी के भाषणों में अक्सर गांधीजी के कथनों और विचारों का समावेश दिखता है।
गांधीजी से प्रभावित और प्रेरित होने वाले नेताओं की देश में कमी नहीं है।
महात्मा गांधी को नमन.. PM मोदी ने दी श्रद्धांजलि, राष्ट्रपति भी पहुंचीं राजघाट।



राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एक ऐसे सर्वमान्य नेता रहे हैं, जिनकी मान्यता दुनियाभर में रही है. एशिया के अलावा मिडिल ईस्ट, अफ्रीका, अमेरिका और यूरोप में सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों में उनका प्रभाव दिखता है. मार्टिन लूथर किंग जूनियर, नेल्सन मंडेला और दलाई लामा जैसे बड़े नेताओं को उन्होंने प्रभावित किया. शायद ही कोई ऐसा भारतीय हो, जिसने गांधीजी के बारे में न पढ़ा हो और प्रभावित न हुआ हो. यहां तक कि उनके वैचारिक विरोधी भी उनसे प्रभावित हुए भी नहीं रह सकते।

गांधीजी से प्रभावित और प्रेरित होने वाले नेताओं की देश में कमी नहीं है लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, महात्मा गांधी से इस कदर प्रभावित और प्रेरित हैं, कि सच्चे तरीके से महात्मा गांधी के विचारों को धरातल में उतारने का काम किसी पीएम ने किया है तो वो पीएम नरेंद्र मोदी हैं।

मोदी सरकार का ‘सबका साथ, सबका विश्वास, सबका विकास और सबका प्रयास’ का दर्शन गांधीवादी विचार से प्रेरित है. क्योंकि यह “सभी राजनीति” से ऊपर उठने का संदेश देता है. आपको बता दें कि वे जब पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने तो शपथग्रहण से पहले गांधीजी की तस्वीर के आगे सिर झुकाकर, उन्हें प्रणाम कर निकले. उसी वक्त उन्होंने ठाना था कि गांधी के विचारों को आत्मसात करके गरीबों और पिछड़ों के उत्थान में अपना जीवन खपा देंगे. पीएम मोदी के भाषणों में तो अक्सर गांधीजी के कथनों और विचारों का समावेश दिखता रहा है।

गांधी के विचार और पीएम मोदी-
गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक, जो भी कार्य पीएम मोदी करते है कहीं ना कहीं महात्मा गांधी के विचारों की छाप साफ झलकती है. स्वदेशी मेक इन इंडिया, राष्ट्रीयता की समझ और अवधारणा, योग, सामाजिक समरसता, हाशिए पर समाज के उत्थान की चिंता, विश्वबंधुत्व आदि पर जोर के नजरिए से महात्मा गांधी जी और नरेंद्र मोदी, दोनों के विचार समान कहे जा सकते हैं. स्वाभाविक रूप से इनके चिंतन को ‘गांधी -मोदी मार्ग या गांधी-मोदी दर्शन की संज्ञा दी जा सकती है।

स्वच्छ भारत-
यह गांधीजी की ही सोच थी कि देश को स्वच्छ किया जाए, क्योंकि यह बात गांधीजी अच्छी तरह जानते थे कि स्वच्छ भारत ही गरीबी और रोग से मुक्त हो पाएगा। यही कारण था कि जब नरेंद्र मोदी सत्ता में आए तो उन्होंने सबसे पहले स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की। 2 अक्टूबर 2014 को देशभर में एक राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत हुई थी, जो अब लगभग सफलता की ओर अग्रसर है। हर भारतीय के कठोर परिश्रम के कारण यह अभियान आज एक ऐसे जीवंत जन आंदोलन में बदल चुका है।


जनभागीदारी के विचार बापू से प्रभावित-
महात्मा गांधी मानते थे कि देश की सभी समस्याओं का समाधान तभी हो सकता है जबकि देश की जनता का उसमें योगदान हो। गांधीजी ने ही जनभागीदारी की बात कही थी। पीएम नरेंद्र मोदी ने गांधीजी के इस मंत्र को अपनाया। बापू के विचारों का ही प्रभाव रहा कि पीएम मोदी ने कई सारे देशव्यापी अभियानों को जनभागीदारी की बदौलत सफल बना दिया। स्वच्छ भारत अभियान इसका एक बड़ा उदाहरण है। नोटबंदी अभियान में भी लोग परेशान हुए तो उन्होंने इसे जनभागीदारी बताते हुए थोड़ा कष्ट सहने की अपील की। लोगों ने उनकी अपील स्वीकार की. और इसके माध्यम से ये नोटबंदी भी सफल साबित हुई। टीकाकरण अभियानों में भी उन्होंने आमजन से अपील करते हुए जनभागीदारी का सहारा लिया, जिसके परिणाम अब इतिहास में दर्ज हो गए हैं. कोरोना काल में भी पीएम मोदी की अपील और जनभागीदारी के जरिये हम अन्य देशों की तुलना में जल्दी उबर पाए।
पर्यावरण में सहयोगी गांधी के विचार-

पीएम नरेंद्र मोदी को भी महात्मा गांधी की तरह पर्यावरण की चिंता सताती रहती है। आज भी महात्मा गांधी के विचार उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे और वे ऐसी अनेक समस्याओं का समाधान कर सकते हैं जिनका सामना आज विश्व कर रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी ने एक बार कहा था, ‘महात्मा गांधी ने एक सदी से भी अधिक पहले मानव की आवश्यकता और उसके लालच के बीच अंतर स्पष्ट किया था. बापू के आदर्शो पर चलते हुए आज भी पर्यावरण को लेकर पीएम मोदी अथक परिश्रम करते हैं।
आतंकवाद की समस्या-

पीएम मोदी कई मौकों पर कहते रहे हैं कि एक ऐसी दुनिया में, जहां आतंकवाद, कट्टरपंथ, उग्रवाद और विचारहीन नफरत देशों और समुदायों को विभाजित कर रही है, वहां शांति और अहिंसा के महात्मा गांधी के स्पष्ट आह्वान में मानवता को एकजुट करने की शक्ति है। ऐसे युग में जहां असमानताएं होना स्वाभाविक है, बापू का समानता और समावेशी विकास का सिद्धांत विकास के आखिरी पायदान पर रह रहे लाखों लोगों के लिए समृद्धि के एक नए युग का सूत्रपात कर सकता है।
गरीब की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझना-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीबी और गरीबों के लिए बहुत सी कार्ययोजनाओं का प्रारंभ किया है। उन्होंने हर गांव में बिजली पहुंचाने और हर घर में गैस कनेक्शन को पहुंचाने का लक्ष्य लगभग पूरा कर लिया है. मोदी कहते हैं कि ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए, जे पीर पराई जाणे रे’ यह बापूजी की सबसे प्रिय पंक्तियों में से एक थी. यही वह भावना थी जिसने उन्हें दूसरों के लिए जीवन जीने के लिए प्रेरित किया।
खादी को बनाया अंतरराष्ट्रीय ब्रांड-

प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार कहा था कि महात्मा गांधी को सबसे अच्छी श्रद्धांजलि उनके दिल के करीब विचारों पर काम करना है। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि महात्मा ने खादी को गांवों में “स्वशासन के उपकरण” के रूप में देखा और उनसे प्रेरित होकर, वे देश के लोग आत्मनिर्भर हो उसकी की दिशा में काम कर रहे है लेकिन पीएम मोदी के प्रयास से आज स्वदेशी खादी का नाम देश ही नहीं दुनिया में हो रही है. खादी को लंबे समय से उपेक्षित किया गया था। लेकिन ‘देश के लिए खादी से फैशन के लिए खादी’ के आह्वान के माध्यम से, यह बहुत लोकप्रिय हो गया है। पिछले 9 वर्षों में इसकी बिक्री में 400 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है।

क्राइम मुखबिर
अपराध की तह तक!

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