यूपी का ये जंगल बन रहा नेपाली गेंडों की पहली पसंद, जानें क्या है पीटीआर का प्लान ——

क्राइम मुखबिर से उप संपादक रतन गुप्ता की रिपोर्ट –


टाइगर रिज़र्व के डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल ने बताया कि खुली सीमा होने के चलते कई बार नेपाल के अभ्यारण से हाथी व गैंडों की आमद दर्ज की जाती है. विभाग की ओर से प्रयास किया जाता है कि वन्यजीवों को अनुकूल वातावरण देकर के संरक्षित किया जाए.

उत्तरप्रदेश के पीलीभीत जिले में स्थित पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगल तराई के क्षेत्र में आते हैं. ऐसे में प्रकृति ने इन जंगलों को अपार संपदा से नवाजा है. बाघों को तो ये जंगल रास आ ही रहा है वहीं पड़ोसी देश नेपाल के शुक्लाफांटा अभ्यारण के गेंडों की भी पहली पसंद बन रहा है.

दरअसल, पीलीभीत जिला शिवालिक पहाड़ियों की तराई में बसा हुआ है. वहीं इस जिले का एक तिहाई भू-भाग वन क्षेत्र है. यह वन पानी के स्रोतों, घने पेड़ पौधों व वन्यजीवों से भरपूर है. इसी को ध्यान में रखते हुए यहां मौजूद बाघों के संरक्षण की योजना बनाई गई. योजना पर अमल करते हुए इस जंगल को सन 2014 में वन्यजीव विहार को टाइगर रिजर्व घोषित कर दिया गया. तब से बाघों की संख्या में लगातार वृद्धि होती आ रही है.

वन्यजीवों को पीलीभीत टाइगर रिजर्व खूब भा रहा
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों के साथ ही साथ यहां सभी वन्यजीवों का कुनबा बढ़ रहा है. यही नहीं पड़ोसी देश नेपाल के शुक्लाफांटा नेशनल पार्क के वन्यजीवों को भी पीलीभीत टाइगर रिजर्व खूब भा रहा है. बीते कुछ समय से लगातार नेपाली गैंडे भारत की सीमा में दाखिल हो कर पीलीभीत के लग्गा-भग्गा इलाके में देखे जाते हैं.
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में स्थित लग्गा-भग्गा इलाका बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट माना जाता है. ऐसे में यह गैंडों व हाथी जैसे विशालकाय वन्यजीवों के लिहाज से काफी अनुकूल हैं. दोनों देशों के जंगल की सीमा खुली होने के चलते वन्यजीव विचरण करते हुए यहां आ जाते हैं. अनुकूलता के चलते वे कई बार यहीं डेरा जमा लेते हैं.अधिक जानकारी देते हुए पीलीभीत टाइगर रिज़र्व के डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल ने बताया कि खुली सीमा होने के चलते कई बार नेपाल के अभ्यारण से हाथी व गैंडों की आमद दर्ज की जाती है. विभाग की ओर से प्रयास किया जाता है कि वन्यजीवों को अनुकूल वातावरण देकर के संरक्षित किया जाए।

क्राइम मुखबिर
अपराध की तह तक !

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