भारत से नेपाल निर्यात पर लगा प्रतिबंध तो तस्कर नेपाल पहुंचाने लगे भारतीय गेहूं चावल

क्राइम मुखबिर से उप संपादक रतन गुप्ता की रिपोर्ट –

 


10/10/2023

क्रामुस – महराजगंज भारत से नेपाल को चावल केंद्र सरकार की ओर से एक पखवाड़े पहले ही चावल के निर्यात पर रोक लगा दिया है। निर्यात पर रोक लगते नेपाल के लिए चावल की तस्करी शुरू हो गई है। इससे राजस्व की क्षति हो रही है। भारतीय बाजार में 2500 मोटा और 3000 हजार रुपये प्रति क्विंटल महीन चावल बिक रहा है। जबकि बार्डर पार पहुंचते ही 3000 मोटा और 3800 रुपये प्रति क्विंटल महीन चावल का भाव हो जाता है। वहीं, अगर पैकिंग करके बेचा जाए तो यह डेढ़ गुना बढ़ जाता है। हाल ही में कई स्थानों पर पकड़ी गई चावल की खेप इस बात की पुष्टि करने के लिए काफी है कि सीमा पर चावल की तस्करी में बड़ा इजाफा हुआ है। जिसका असर आने वाले दिनों में यहां देखा जा सकता है।

नेपाल सीमा से लगने वाली जिले की 50 किलोमीटर सीमा पूरी तरह से खुली हुई है। यहां बिना रोक टोक के दोनों देश के लोग आते-जाते हैं। लेकिन देशविरोधी तत्व दोनों देशों में बिकने वाली वस्तु की जब भी मांग बढ़ती है तो उसकी तस्करी शुरू कर देते हैं। चाहे वह सोना, चांदी और अन्य सामान हो या फिर अनाज। सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों के अलावा सीमावर्ती थानों की पुलिस तैनात रही है। लेकिन सीमा खुली होने के कारण तस्कर पगडंडी का भी सहारा लेते हैं। पिछले एक पखवाड़ा से तस्करों ने चावल तस्करी शुरू कर दी है। इसके पीछे जहां नेपाल में चावल की मांग और बाजार भाव बड़ा है।

भारतीय बाजार का गेहूं नेपाल में पहुंचाने लगा है। अबतक कई बार सीमावर्ती क्षेत्र में बार्डर पार करने की कोशिश करते हुए एसएसबी और पुलिस की ओर से गेहूं की खेप पकड़ी जा चुकी है। हरदी डाली ,भगवानपुर सोनौली ,ठुठीबारी , बार्डर से प्रतिदिन 800 से 1000 क्विंटल चावल नेपाल जाता है।
सीमा पर पकड़ी गई गेहूं की खेप

1. दो दिन पहले एसएसबी और पुलिस चावल बरामद किया गया। पूछताछ में चावल के संबंध में चालक कोई जवाब नहीं दे सका। इसके बाद उसे जब्त कर लिया गया।

2. एक सप्ताह पहले सीमा से सटे रात में कुछ लोग साइकिल पर बोरा लादे हुए जाते दिखे। शोर हुआ, लेकिन जब तक पुलिस और सुरक्षा एजेंसी से जुड़े लोग मौके पर पहुंचते 10 साइकिल पर 20 बोरी से अधिक चावल लेकर तस्कर उस पार जा चुके थे। जानकारी इस प्रकार की हुई बोरी फटने से चावल गिरा हुआ था।

बड़ी खेप पकड़ी गई तो बदल दिया तस्करी का तरीका

जब गेहूं, चावल का बड़ा खेप कई स्थानों पर पकड़ा गया तो तस्करों ने तरीका बदल दिया। अब तस्कर कैरियर का सहारा लेने लगे हैं। बेरोजगारों को पकड़कर 300 रुपये बोरी दे रहे हैं। उनकी जिम्मेदारी रात के अंधेरे में सीमा पार पहुंचा देना है। जितना चक्कर उतने रुपये आसानी से मिल जाते हैं। यह इसलिए कि सुरक्षा एजेंसियां भी किसान बताने पर छोड़ देती हैं।
भैरहवा बुटवल में गल्ला मंडी होता है स्टोर, फिर नेपाल की पहाड़ियों तक पहुंचता है चावल

तस्कर की ओर से तैयार किए गए कैरियर को बताया जाता है कि यहां से लेकर फला स्थान पर सामान ले जाकर रखना है। वहीं जब कई लोग पहुंचा देते हैं, इसके बाद जब एक गाड़ी के लिए बोरी हो जाती है। तब उसे लादकर नेपाल की मंडी में पहुंचाया जाता है। जहां पर पैकिंग के साथ ही बोरी बनती है। प्रति किलो और प्रति क्विंटल का लेबल लगता है। इसके बाद पहाड़ियों तक पहुंचता है। जितनी दूरी और सुंदर पैकेट उतना ही अधिक मूल्य।



5000 क्विंटल से अधिक चावल पहुंच जाता है नेपाल

नेपाल से जुड़े कारोबारी के मुताबिक सीमावर्ती क्षेत्र के गल्ले की दुकान पर भारतीय चावल और गेहूं दिखता है। यह चावल तस्करों का जरिये लाया गया होता है। क्योंकि लीगल तौर पर भारत से जाने वाला चावल बड़ी मंडियों में जाता है। न की बार्डर क्षेत्र की दुकानों पर। औसत प्रतिदिन 68 किलोमीटर सीमा क्षेत्र में 5000 क्विंटल से अधिक चावल भारत से पहुंच जाता है।
नौतनवा ,सोनौली ठुठीबारी से प्रतिदिन 10000 क्विंटल चावल नेपाल जाता है। बाडरो पर जगह जगह डम्पी कर भेजते हैं

भाव के हिसाब से लगता है टैक्स-

भारतीय बाजार के गल्ला कारोबारी सूरज जयसवाल जायसवाल के मुताबिक एक बोरी पर डेढ़ प्रतिशत सरकारी टैक्स लगता है। जो मौजूदा भाव के हिसाब से प्रति क्विंटल 40-45 रुपये पड़ रहा है। जब बाजार में रेट बढ़ेगा तो उसी हिसाब से टैक्स भी बढ़ जाता है। नेपाल जाने पर जहां भाव अधिक मिल जाता है, वहीं एक हजार बोरी पर बिना कुछ किए ही 30 हजार रुपये बच जाएगा।-

प्रतिदिन लाखों के राजस्व नुकसान –

नाम नहीं छापने की शर्त पर एक बड़े गल्ला कारोबारी ने बताया कि सोनौली ,नौतनवा ,भगवानपुर ,ठुठीबारी और आगे तक तस्करों का जाल फैला हुआ है। जो बड़ी मात्रा में चावल और गेहूं रात के अंधेरे में बार्डर पार करने का कार्य कर रहे हैं। प्रतिदिन कई लाख रुपये से अधिक राजस्व का नुकसान हो रहा है। जबकि अन्य राज्यों में लेकर जाकर बेचने का कार्य करने वाले कारोबारियों को ट्रक ही नहीं लग पा रहा है।



तस्करी में कई लोगों का हाथ

पहले चरण में अढ़तिया गांव-गांव जाकर खरीद कर रहे हैं। इसके बाद वह अपने से बड़े कारोबारी को देते हैं। जिसका नेपाल में आना-जाना होता है। यहां से रेट तय होने के बाद वह किसी भी माध्यम से नेपाल में मंगवा लेते हैं। वहां से वह दूसरे कारोबारी को देते हैं। जो पैकिंग और ब्रांडिंग करता है। बोरी और पैकेट के रेट से बाजार में बेचता है।



1500-1800 रुपये प्रति क्विंटल मुनाफा-

नेपाल के गल्ला बाजार के मुताबिक वहां पर मौजूदा समय में भारतीय मुद्रा के हिसाब से मोटा तीन हजार रुपये और महीन चावल का रेट 3800 रुपये है जो रोज घटता और बढ़ता है। किसी किसी दिन रेट कम हो जाता है तो किसी से 150-300 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर आ जाता है। वही, जब पैकिंग हो जाता है तो छोटे पैकेट वाला महीन 45 से 50 रुपये किलो और मोटा 35-40 रुपये किलो बिकता है।



इसलिए नहीं रुक रही तस्करी

सुरक्षा विभाग से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि सीमा पर पकड़ी जाने वाली हर वस्तु को नौतनवा कस्टम को सुपुर्द कर दिया जाता है। कस्टम के लिए जो कानून बना है वह बहुत ही कमजोर है। इसलिए बहुत कम जुर्माना पर पकड़ा गया सामान छोड़ दिया जाता है। अगर पकड़े गए सामान के हिसाब से उसकी कीमत लगाते हुए जुर्माना लगाया जाए तो तस्करी में अपने आप कमी आ जाएगी। लेकिन ऐसा किया नहीं जा रहा है, जिसकी तस्करी रुक नहीं रही है। इस पर कठोर कानून बनाने की जरूरत है।


नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियां के साथ सीमावर्ती थानों की पुलिस अलर्ट है। हर संदिग्धों से पूछताछ की जाती है। अवैध रूप से बार्डर पार सामान ले जाने की कोशिश करने वालों को पकड़कर कार्रवाई की जा रही है। पकड़े जाने वालों पर लगातार पुलिस टीम कार्रवाई कर रही है।

सीमावर्ती भारतीय पुलिस निचलौल ,नौतनवा

क्राइम मुखबिर
अपराध की तह तक!

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