आवारा देशी कुत्तों को गोद लेने के लिए जागरूक करेगी योगी सरकार, बनाए जाएंगे एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर


रिपोर्टर रतन गुप्ता महराजगंज 12अक्टुबर2022
उत्तर प्रदेश नगर विकास विभाग श्वान वंशीय पशुओं के लिए आदर्श कार्यवाही प्रक्रिया तैयार करने जा रही है। इसका माडल ड्राफ्ट सभी नगरीय निकायों को भेजकर 15 दिनों में विस्तृत कार्ययोजना भेजने के लिए कहा है।

उत्तर प्रदेश योगी आदित्यनाथ सरकार आवारा कुत्तों से आमजन को हो रही परेशानी को देखते हुए अब इनकी संख्या सीमित करने के लिए कई कदम उठाने जा रही है। सरकार प्रदेश के सभी जिलों में चरणबद्ध तरीके से एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर बनाने के साथ ही देशी कुत्तों को गोद लेने के लिए आम लोगों को जागरूक करेगी। मानक के अनुसार प्रत्येक 100 व्यक्ति पर तीन कुत्तों का अनुपात है। इस आधार पर देशी कुत्तों को पालतू बनाए जाने के लिए जन संदेश दिया जाएगा। विदेशी कुत्तों के विक्रय और प्रजनन केंद्र भी अब बगैर लाइसेंस नहीं चल पाएंगे। इनमें सख्ती बरती जाएगी।

बनाई जा रही एसओपी
उत्तर प्रदेश नगर विकास विभाग श्वान वंशीय पशुओं के लिए आदर्श कार्यवाही प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने जा रही है। इसका माडल ड्राफ्ट सभी नगरीय निकायों को भेजकर 15 दिनों में विस्तृत कार्ययोजना भेजने के लिए कहा है। इस ड्राफ्ट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पिछले दिनों मन की बात कार्यक्रम को याद करते हुए कहा गया है कि देशी नस्ल के कुत्तों को बढ़ावा दिया जाए। इसी आधार पर अब प्रदेश सरकार देशी कुत्तों को गोद लेने के लिए प्रोत्साहित करेगी। इससे सड़कों पर आवारा कुत्तों की संख्या में कमी आएगी।

देशी कुत्तों के पंजीकरण में मिलेगी छूट

10 या इससे कम देशी निराश्रित कुत्तों को सड़क अथवा पशु शरणालयों में गोद लेने वाले परिवारों को नगरीय निकायों में पंजीकरण में छूट देने की भी बात है। यदि उस निकाय में एनीमल बर्थ कंट्रोल सेंटर है तो ऐसे कुत्तों की नसबंदी एवं प्रथम टीकाकरण मुफ्त किया जाए। गलियों के आवारा कुत्तों की संख्या कम करने के लिए वहां खाद्य सामग्री की उपलब्धता भी नियंत्रित करने के लिए कहा गया है।

विदेशी नस्ल के कुत्तों का पंजीकरण जरूरी
घरों में पाले जाने वाले विदेशी नस्ल के कुत्तों का पंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए उनका नियमित टीकाकरण प्रमाण पत्र प्राप्त किया जाए। ड्राफ्ट में यह भी कहा गया है कि बगैर लाइसेंस संचालित विदेशी कुत्तों की बिक्री व प्रजनन केंद्रों को न चलने दिया जाए। इसमें यह भी बताया गया है कि एनीमल बर्थ कंट्रोल सेंटर अभी लखनऊ, गाजियाबाद व अयोध्या नगर निगम में ही संचालित है। शेष 14 नगर निगमों में अगले दो वर्ष में सेंटर का निर्माण पूरा कराया जाए। इसके अलावा शेष 58 जिलों में यह सेंटर चरणबद्ध तरीके से पांच वर्षों में बनाए जाएं

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